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  1. दलित समाज के लिये एक सन्देश

    श्री गुरु रविदास जी के मंदिर को ढाये जाने पर बहुत पीड़ा हुई। जो मंदिर आज़ादी से भी कई दशक पहले बना था, वो सरकारी ज़मीन पर या संरक्षित वन क्षेत्र में कैसे हो सकता है, क्यूंकि तब तो भारत सरकार का कोई वजूद ही नहीं था। और अगर मान भी लिया जाये कि ऐसा कुछ था, तो सरकार को बड़े आदर और स्नेह के साथ वो ज़मीन मंदिर को दे देनी चाहिए थी, क्योंकि गुरु रविदास जी तो सारे देश के लिए पूज्य हैं, और उस मंदिर का किसी और धर्म वालों से कोई विवाद भी नहीं है, और ऐसा भी कुछ नहीं है कि वो मंदिर किसी हाइवे के आड़े आता हो।

    तो फिर मंदिर को तोड़ कर क्यों करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत किया गया? क्या इसके पीछे मनुवादी सोच है? या फिर दलित समाज से पिछले चुनाव में 'जय भीम जय मीम' का नारा लगाने का बदला लिया जा रहा है? अगर ऐसा कुछ है, तो इस घटिया सोच और नीचतापूर्ण क़दम की जितनी निन्दा की जाये वो कम है। और इस बात का भी बड़ा दुख हुआ कि जो मीडिया किसी मशहूर अभिनेता को छींक भर आने पर कैमरे ले कर उमड़ पड़ता है, उसने दलित भाइयों की आवाज़ को देश तक नहीं पहुंचाया और इस अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाई। पहली बार ऐसा लगा कि जो लोग दबी आवाज़ में कह रहे हैं कि मीडिया बिक चुका है या मीडिया आज़ाद नहीं है, वो सच ही कह रहे हैं।

    सवाल ये है कि अब आगे क्या करना चाहिए? एक बात मैं सभी भाइयों से कहना चाहता हूँ कि किसी मंदिर को तोड़ कर, या फिर सार्वजनिक या किसी की निजी संपत्ति को नुक़्सान पहुंचा कर तो हमारा पूरा दलित समाज बदनाम हो जायेगा और हम भी उसी श्रेणी में आ जायेंगे जिसमें वो लोग हैं जिन्होंने साज़िश कर के इस मंदिर को तोड़ा है। जो भी युवा नेता ऐसी सलाह दे रहे हैं वो या तो जोश में होश खो बैठे हैं, या फिर इस पूरे झगड़े से कोई राजनितिक लाभ उठाना चाहते हैं। इस बात को समझिये कि दिल्ली के जो शहरी 21 अगस्त को ट्रैफ़िक जाम में घंटों फंसे रहे और जिनकी कारों के शीशे तोड़ दिए गए उन्हें हम लोगों से पहले हमदर्दी होगी भी तो अब नहीं रही। और आम जनता पर अपना ग़ुस्सा क्यों निकाला जाये – मंदिर उन्होंने तो नहीं तोड़ा है ना?

    इस अन्याय का विरोध करने का सबसे बढ़िया तरीक़ा ये होगा कि पूरे भारत में दलित भाई कल से सफ़ाई करना बंद कर दें, अपने दफ़्तर में लम्बी छुट्टी की याचिका देकर। अपनी एकता और जनशक्ति दिखाने के लिये दिन भर किसी सार्वजानिक स्थान पर बिना किसी को परेशान किये शांतिपूर्वक बैठें और सतगुरु रविदास जी के भजन सुनें, और आम नागरिकों को इस अन्याय के बारे में जानकारी दें। जब कुछ ही दिनों में देश भर में सड़कों पर कूड़े के ढेर लगेंगे और सीवरेज रुक जायेंगे तो सरकार को जागना ही पड़ेगा और अपना फ़ैसला बदलना पड़ेगा।

    अगर आपको मेरी बात सही लगी हो तो कृपया इस सन्देश को जितना हो सके शेयर करें। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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